ठाकुर की 3 नाजायज़ बेटियां

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हेलो दोस्तों, मैं यहाँ एक ऐसी दास्ताँ बयां करने जा रहा हूँ जिसकी कशिश और कामना आपको ज़िन्दगी भर रहेगी| ये ठाकुर बलवीर सिंह की नाजायज़ बेटियों की एक साथ चुदने की hindi sexy kahani है | ये कहानी 2 भागों में है| अभी पहला भाग पेश कर रहा हूँ|


ठाकुर बलवीर सिंह की शानदार हवेली लखनऊ के सबसे आधुनिक इलाके में बनी हुई थी। बलवीर सिंह एक ५५ वर्ष के बहुत ही रोबिले और रुतबेदार ठाकुर थे। गरम राजपूती खून उनकी रगों में था और इस ५५ वर्ष की अधेड़ उम्र में भी उनका बदन जवानों को मात देता था। लम्बा कसरती कद, सिर पर स्याह काले बाल और घनी मूंछे देखकर कोई भी उनसे आखे नहीं मिला पाता। जब ठाकुर जी २८ वर्ष की उम्र के थे तब उनका विवाह हुआ। पर ठकुराईन उनकी तरह तन्दुरूस्त नहीं निकली। वह जब से हवेली में आई अक्सर बिमार ही रहती। विवाह के १५ साल बाद यानि कि जब बलवीर सिंह ४३ वर्श के थे तभी ठकुराईन उन्हें औलाद का मुँह दिखाये बिना रन्डुआ बना कर ऊपर चली गयी। फिर बलवीर सिंह ने दूसरा विवाह नहीं किया।


विधुर बलवीर सिंह की हवेली फिर भी चहचहाटों से भरी हुई थी। हवेली में हर समय तीन खुबसूरत हसीन बहनों की हँसी मज़ाक कि आवाज़ ही सुनाई पड़ती थी। ये तीन हसीन बहनें ठाकुर बलवीर सिंह के स्वर्गीय बड़े भाई की निशनी थीं। लेकिन इन तीन लड़कियों के बाप ठाकुर बलवीर सिंह ही थे। आज से ३५ साल पहले बलवीर सिंह की भाभी इस हवेली में आई थीं हवेली खुशियों से भर उठी थी। फिर ५ साल बाद ही भाभी उदास रहने लगीं। बलवीर सिंह भाभी का बहुत आदर करते थे, पर देवर होने के नाते देवर भाभी के मजाकों से भी नहीं चूकते थे। जबसे भाभी खोई खोई रहने लगी। तो बलवीर सिंह भाभी के और निकट आ गये।

तभी उन्हें पता चला कि उनके बड़े भाई में भाभी की गोद भरने की हिम्मत नहीं है। उस समय बलवीर २५ साल के बहुत ही तन्दुरुस्त आकर्षक नवयुवक थे। बड़े भाई साहब ज्यादातर राजनिती में रहते थे। देवर भाभी एक दूसरे से खुल के दिल का हाल कहने लग गये था और एक बार बडे भैया जब एक सप्ताह के लिये दिल्ली गये तो देवर भाभी के सारे सब्र के बान्ध टूट गये और यह रिश्ता आज से २० साल पहले तक चला जब बडे भैया और भाभी दोनों एक साथ ट्रेन दुर्घटना में मारे गये तो बलवीर सिंह के अपनी भाभी से नाजायज़ सम्बन्ध १० साल तक कायम रहे। यानी कि बलवीर की २५ वर्ष से लेकर ३५ वर्ष की उम्र तक।


देवर भाभी के इस मधुर सम्बन्ध ने भाभी की गोद में एक एक करके तीन हसीन लड़कियाँ डाली। सबसे बड़ी कविता है जो आज २७ साल की एक बहुत ही खूबसूरत नवयुवती बन चुकी है। अभी वह लखनऊ की मशहूर गल्र्स कॉलेज में हिन्दी की प्रोफेसर है और साथ-साथ पी.एच.डी भी कर रही है। दूसरी शालिनी है, उम्र २५ साल और चेहरे और उसकी अदाओं में हमेशा हरियाली छाई रहती है। जब देखो तब खिले हुये गुलाब सा मुस्कराता चेहरा। वह भी गल्र्स कॉलेज में एम. ए. कर रही है। तीसरी का नाम डॉली है; उम्र २२ साल और गल्स कॉलेज में इसी बी.ए. फाईनल यिअर में आई है। सबसे छोटी डॉली टमाटर सी लाल और बहुत ही गदराये बदन की है। सबसे छोटी होने के नाते उसे हवेली में सबसे ज्यादा दुलार मिला।

बलवीर सिंह इस हकीकत से अच्छी तरह वाकिफ़ थे कि ये तीनों लड़कियाँ उन्हीं का खून हैं और जब वे विधुर हो गये तो उन्होंने दूसरी शादी नहीं की और अपनी तीनों बेटियों की हर खुशी को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ते। बे-औलाद बलवीर सिंह ने अपने ही खून इन तीनों बेटियों को बाप से भी ज्यादा प्यार दिया है। नतीजा यह हुआ कि तीनों के पन्ख लग गये तीनों बहनों का बदन बहुत ही सेक्सी था। उनकी चूचियाँ और चुत्तड़ बहुत फुल-फुले थे और कोड़ भी मर्द उनको देख कर विचलित हुये बिना नहीं रहता। इनके चाचा का लखनऊ में बहुत दब-दबा था और इसलिये कोई लड़का इनकी तरफ अपनी आख भी उठा कर दखने की जुरंत नहीं करता।

तीनों बहनों के पास सारी सुख सुविधायें मौजूद थी। बलवीर ने इन्हें आलिशान इम्पोटेंड कार दे रखी थी। तीनों लड़कियाँ एक रविवार को शाम ४ बजे के करीब कार में सवार होकर शहर में मस्ती करने निकली हुई थीं। कार कि ड्राइविंग कविता कर रही थी। कार अचानक एक जोरदार झटके के साथ रुक गयी। साथ बैठी शालिनी ने कविता से पुछा, " कविता क्या बात है, तुमने अचानक कार क्यों रोक दी।" कविता बोली, "ज़रा कार के सामने का नजारा तो देखो कितना नशीला नजारा है। तब शालिनी और डॉली ने सामने देखा कि कार के सामने बीच सड़क पर एक कुत्ता एक कुतिआ पर चढ़ने की कोशीश कर रहा है। कुत्ते का लगभग ४ इन्च लम्बा नोकिला लंड बाहर निकला हुआ था। कुछ देर की कोशीश के बाद कुत्ते ने अपना लंड कुतिया की चूत में डाल दिया। अब कुत्ता कुत्तिया पर पीछे से चढ़ा हुआ उसे मस्ती से चोद रहा था। तब शालिनी ने कहा "यार कविता! तुम ऐसा कोई भी मौका नहीं छोड़ती" कविता बोली, "हमसे तो किस्मत वाले यह कुत्ते कुतिआ ही है। ना जगह देखते ना मौका। जहाँ मन किया शुरू हो गये। देखो कितिया क्या मस्ती से अपनी चूत चुदवा रही है।" तब डॉली बोली, "हां हमारे चाचा बलवीर सिंह के डर के मारे कोड़ लड़का हमारी और आख भी उठा कर नहीं देखता लगता है कि अपने नसीब में कुवारी ही रहना है और अपनी चूत की आग अपनी अंगुलिओं से ही बुझनी है।"

यह सुनकर कविता ने कार स्टार्ट कर दी। वोह किन्ही ख्यालों में खो गई तीनों बहनें आपस में काफी खुली हुई थीं और एक दूसरे को दोस्त की तरह ट्रीट करती थीं कविता तो हमेशा सैक्सी मूड में रहने वाली लड़की थी ही और उसकी बातों का टॉपिक हमेशा सैक्स ही रहता था। तीनों बहनें खास सहेलियों की तरह खुल के सैक्स पर बात करती तीनों बहनों का हवेली में एक आलीशान कमरा मिला हुआ था जिस पर तीनों बहनें एक साथ सोती थीं और एक बड़ा बाथरूम अटैचड् था। तीनों बहनें रात को मिल कर इन्टरनेट पर ब्लू फिल्म और दूसी सैक्सी साइट्स डाउनलोड करती और आपस में एक दूसरे की चूंचियाँ मसलती, चूत चाटती और अपनी या एक दूसरे की चूतों को बैंगन/मोमबत्ती इत्यादि से चोदती कभी अगर मौका मिलता तो हवेली में से ही चाचा बलवीर सिंह की शराब/सिगरेट चूरा कर अपने कमरे की प्राइवेसी में मौज करती थीं।

कविता कुत्ते कुतिया की चुदाई देख कर पूरी गरम हो गई थी। उसे तालाश थी तो एक लंड की; वोह चाहे जिस किसी का भी हो। उसके दिमाग में तब एक आईडीया आया और कविता ने कार प्रोफ़ेसर विजय के घर के तरह मोड़ दी। प्रोफ़. विजय की उमर उस समय लगभग ३५ साल की थी और उनकी शादी अभी नही हुड़ थी। वो बहुत ही रंगीन मिज़ाज़ के थे मतलब वो एक बहुत चोदु आदमी थे। उनके लंड की लम्बायी ७" और मोटाड़ ४" की थी और यह बात कॉलेज की लगभग सभी लड़कियों और मैडम को मालुम थी। उनको अपने लंड और अपनी चुदाड़ की कला पर बहुत गर्व था और कॉलेज की कई लड़कियां और मैडम उनसे अपनी चूत चुदवा चुकी थीं विजय इन सब लड़कियों और मैडम को बातों में फंसा कर अपने घर ले जाया करता था और फिर उनको नंगी करके उनकी चूत चोदा करता था और यह बात इन तीन बहनों को मालुम थी।

इन तीन बहनों ने अपनी कार प्रोफ़. विजय के घर के सामने जा कर रोकी। प्रोफ़. विजय उस समय अपने घर पर ही थे और एक लुगी पहन कर शराब की चुस्कियाँ लेते हुए और अपना लंड सहलाते हुए एक ब्लु फ़िल्म देख रहे थे। कॉल बैल बजी तो प्रोफ़. विजय टी:वी की आवाज़ म्यूट करके दरवाज़ा खोला क्योंकि टीवी उनके बेडरूम में था। सामने तीनों बहनों को देख कर बोले "अहा आज तो हमारे भाग ही खुल गये" विजय ने तीनों को बाहर के कमरे में बैठाया। टी.वी. उनके बेडरूम में था जिसका दरवाज़ा सामने था पर जहाँ तीनों बहनें बैठी थीं वहाँ से टी.वी. दिखायी नहीं पड़ रहा था। तभी कविता ने कहा, "मैं पिछली बार जब आपसे अपनी थीसिस में गाइडैस के लिए आयी थी तो आपने काफी मदद की थी और बहुत अच्छे टिप्स दिये थे। आज भी मैं इसी सिलसिले में आयी हूँ। अगर आप हिन्दी साहित्य के रिति-काल से सम्बन्धित कुछ रैफैन्सिस चाहिए।" पिछली बार जब कविता यहाँ एक सहेली के साथ आयि थी तो बेडरूम में बैठ कर थीसिस डिस्कस की थी. तभी कविता वहाँ से उठी और सीधे प्रोफ़. विजय के कमरे की और मुड़ गयी। उसके साथ-साथ शालिनी और डॉली भी हो ली। तभी विजय को कुछ याद आया और हड़बड़ा के बोले " अरे रुको तो, वहाँ कहाँ जा रही हो तुम लोग" पर तब तक देर हो चूकी थी।


कमरे में टी.वी. पर उस समय एक गरमागर्म चुदाड़ का सीन चल रहा था जिस में एक आदमी दो लड़कियों को अपने लंड और अपनी जीभ से चोद रहा था। लड़कियां अपनी चूत चुदते समय अपनी अपनी कमर उछाल कर लंड और जीभ अपनी चूत में ले रही थीं।


शालिनी, डॉली और विजय का लंड

प्रोफ़. विजय इन तीन बहनों के सामने घबड़ाहट दिखाते हुए बोले "अरे अचानक तुम लोग यहा क्यों पहुँच गयीं?" कविता जो पहले से ही पूरी गरम थी, टीवी पर यह दृश्य देख कर और गरम हो गयी। उसने शालिनी की आखों में देखा और आखों ही आखों में कह दिया कि "कुछ करो" तब कविता बोली, "आप तो टी.वी पर रीति-काल से सम्बन्धित ही फ़िल्म देख रहे हैं। यहाँ तो नायक नायिकाओं की रास-रीति साक्षात चल रही है।" प्रोफ़. विजय ने उन तीनों बहनों के चेहरे देख कर उनकी मन की बात पहचान ली और उनसे पुछा, "हम जो कुछ टी.वी. पर देख रहे थे, क्या तुम लोग भी शूरू से देखना चहोगी?" तीनों बहनों ने एक साथ अपना अपना सर हिला कर हामी भर दी। प्रोफ़. विजय ने फिर टी.वी. ऑन कर दिया और सब लोग पलंग और सोफ़ा पर बैठ कर ब्लु फ़िल्म देखने लगे। विजय ने उन्हें शराब आफ़र की और तीनों बहनों ने सहर्ष स्वीकार कर ली। विजय एक सोफ़ा पर बैठे थे और उनकी बगल वाले सोफ़ा पर शालिनी और डॉली बैठी थी और पलंग पर कविता बैठी थी। उधर प्रोफ़. विजय ने देखा कि ब्लु फ़िल्म की चुदाड़ का सीन देख कर तीनों बहनों का चेहरा लाल हो गया और उनकी सांस भी जोर जोर से चल रही थी। उनके सांसों के साथ साथ उनकी चुचियां भी उनके कपड़े के अन्दर उठ बैठ रही थी। एक साथ तीन जोड़ी चुचियां एक साथ उठ बैठ रही थीं और सांसे गर्म हो रही थीं। क्या हसीन नजारा था। तीनों बहनों पर शराब का भी सुरूर छा रहा था। कुछ देर के बाद कविता, जो कि इन बहनों में सबसे बड़ी थी, अपना हाथ अपने बदन पर, चुची पर फेरने लगी। प्रोफ़. विजय उठ कर कविता के पास पलंग पर बैठ गये। उन्होंने पहले कविता के सर पर हाथ रखा और एक हाथ से उसके कन्धों को पकड़ लिया। इससे कविता का चेहरा प्रोफ़. विजय के सामने हो गया। विजय ने धीरे से कविता के कानों के पास अपना मुंह रख पुछा, "क्या बहुत गर्मी लग रही है, पंखा चला ढुं? कविता बोली, "नही ठीक है," और फिर विजय सर के चेहरे को आंखे गड़ा कर देखने लगी। विजय ने पलंग से उठ कर पंखा फुल स्पीड में चला दिया। पंखा दिखने लगी।

विजय फिर पलंग पर कविता के बगल में अपनी जगह बैठ गये। उन्होंने कविता का एक हाथ अपने हाथ में ले लिया और धीरे से पुछा, "क्या मैं तुम्हरे हाथ को चूम सकता हुं?" कविता यह सुनते ही पहले अपनी बहनों के तरह देखी और फिर अपना हाथ विजय के हाथों में ढीला छोड़ दिया। विजय ने भी फुर्ती से कविता का हाथ खींच कर उसके हथेली पर एक चुम्मा दे दिया। चुम्मा दे कर वो बोले, "बहुत मीठा है तुम्हारा हाथ और हमे मालुम है कि तुम्हरे होटों का चुम्मा इससे भी मीठा होगा।" यह कह कर विजय कविता की आंखो में देखने लगे। कविता तो पहले कुछ नही बोली, फिर अपने हाथ विजय के हाथों से खींचते हुए अपना मुंह उनके पास कर दिया और बोली, "जब आपको मालुम है कि मेरे होटों का चुम्मा और भी मीठा होगा और आपको सुगर की बिमारी नही है, तो देर किस बात की और मीठा खा लिजिये" कविता की बात सुन कर विजय ने अपना होंठ कविता के होंठ पर रख दिया। फिर उन्होंने अपने होंठों से कविता के होंठ खोलते हुए कविता का निचला होंठ चुसने लगे। कविता ने अपने होंठ चुसाड़ से गर्म हो कर विजय के कन्धों पर अपना सर रख दिया। विजय ने कविता का रिएक्शन देख कर धीरे से अपना हाथ बढ़ा कर कविता की एक चुची ब्लाउज़ के उपर से पकड़ ली। विजय एक हाथ से कविता की एक चुची सहला रहे थे और दुसरा हाथ उसके चुतड़ पर फेर रहे थे। कविता उनकी इस हरकत पर पहले तो थोड़ा कसमसाड़ और अपनी बहनों की तरफ़ देखते हुए उसने भी विजय को जोर से अपनी बाहों में भींच लिया। विजय अब कविता की दोनों चुचियों पर अपने दोनों हाथ रख दिये और कविता की दोनों चुचियों को पकड़ कर मसलने लगा। यह पहली बार था कि किसी मर्द का हाथ कविता के शरीर को छु रहा था और ऊपर से शराब का सुरूरा वो बहुत गर्म हो गयी और उसकी सांसे जोर जोर से चलने लगी। विजय कविता के चुची को मसलते हुए कविता को होटों को चुमने लगा।

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