धोबी घाट पर माँ और मैं-5 - Maa-Beta Ke Beech Chudai Ki Kahaniyan

007

Rare Desi.com Administrator
Staff member
Joined
Aug 28, 2013
Messages
68,482
Reaction score
600
Points
113
Age
37
//in.tssensor.ru मेरे मुख से तो आवाज ही नहीं निकल रही थी।
फिर उसने हल्के-से अपना एक हाथ मेरी जांघों पर रखा और सहलाते हुए बोली- हाय, कैसे खड़ा कर रखा है, मुए ने?

फिर सीधा पजामे के ऊपर से मेरे खड़े लण्ड (जो माँ के जगने से थोड़ा ढीला हो गया था, पर अब उसके हाथों का स्पर्श पाकर फिर से खड़ा होने लगा था।) पर उसने अपना हाथ रख दिया- उई माँ, कैसे खड़ा कर रखा है? क्या कर रहा था रे, हाथ से मसल रहा था क्या? हाय बेटा, और मेरी इसको भी मसल रहा था? तू तो अब लगता है, जवान हो गया है। तभी मैं कहूँ कि जैसे ही मेरा पेटिकोट नीचे गिरा,
यह लड़का मुझे घूर घूर कर क्यों देख रहा था? हाय, इस लड़के की तो अपनी माँ के ऊपर ही बुरी नजर है।

'हाय माँ, गलती हो गई, माफ कर दो।'
'ओहो. अब बोल रहा है गलती हो गई, पर अगर मैं नहीं जगती तो तू तो अपना पानी निकाल के ही मानता ना ! मेरी छातियों को दबा दबा के !! उमम्म बोल, निकालता या नहीं, पानी?'
'हाय माँ, गलती हो गई।'
'वाह रे तेरी गलती, कमाल की गलती है। किसी का मसल दो, दबा दो, फिर बोलो की गलती हो गई। अपना मजा कर लो, दूसरे चाहे कैसे भी रहे।'

कह कर माँ ने मेरे लंड को कस के दबाया, उसके कोमल हाथों का स्पर्श पा के मेरा लंड तो लोहा हो गया था और गरम भी काफी हो गया था- हाय माँ छोड़ो, क्या कर रही हो?
माँ उसी तरह से मुस्कुराती हुई बोली- क्यों प्यारे, तूने मेरा दबाया तब, तो मैंने नहीं बोला कि छोड़ो। अब क्यों बोल रहा है तू?
मैंने कहा- 'हाय, माँ तू दबायेगी तो सच में मेरा पानी निकल जायेगा। हाय, छोड़ो ना माँ।'

'क्यों, पानी निकालने के लिये ही तो तू दबा रहा था ना मेरी छातियाँ? मैं अपने हाथ से निकाल देती हूँ, तेरे गन्ने से तेरा रस, चल जरा अपना गन्ना तो दिखा।'
'हाय माँ, छोड़ो, मुझे शरम आती है।'
'अच्छा, अब तो बड़ी शरम आ रही है, और हर रोज जो लुन्गी और पजामा हटा हटा कर जब सफाई करता है तब? तब क्या मुझे
दिखाई नहीं देता क्या? अभी बड़ी एक्टिंग कर रहा है।'

'हाय, नहीं माँ, तब की बात तो और है, फिर मुझे थोड़े ही पता होता था कि तुम देख रही हो।'
ओह, ओह, मेरे भोले राजा, बड़ा भोला बन रहा है, चल दिखा ना, देखूँ कितना बड़ा और मोटा है तेरा गन्ना?
मैं कुछ बोल नहीं पा रहा था, मेरे मुंह से शब्द नहीं निकल पा रहे थे और लग रहा था जैसे मेरा पानी अब निकला कि तब निकला।

इस बीच माँ ने मेरे पजामे का नाड़ा खोल दिया और अंदर हाथ डाल कर मेरे लंड को सीधा पकड़ लिया।
मेरा लंड जो केवल उसके छूने के कारण से फुफकारने लगा था, अब उसके पकड़ने पर अपनी पूरी औकात पर आ गया और किसी मोटे लोहे की छड़ की तरह एकदम तन कर ऊपर की तरफ मुंह उठाये खड़ा था।

माँ मेरे लंड को अपने हाथों में पकड़ने की पूरी कोशिश कर रही थी पर मेरे लंड की मोटाई के कारण से वो उसे अपन मुठ्ठी में अच्छी तरह से कैद नहीं कर पा रही थी।
उसने मेरे पजामे को वहीं खुले में पेड़ के नीचे मेरे लंड पर से हटा दिया।

'हाय माँ, छोड़ो, कोई देख लेगा, ऐसे कपड़े मत हटाओ।'
मगर माँ शायद पूरे जोश में आ चुकी थी- चल, कोई नहीं देखता। फिर सामने बैठी हूँ, किसी को नजर भी नहीं आयेगा। देखूँ तो सही
मेरे बेटे का गन्ना आखिर है कितना बड़ा?

और मेरा लंड देखते ही आश्चर्य से उसका मुंह खुला का खुला रह गया, एकदम से चौंकती हुई बोली- हाय दैय्या!! यह क्या?? इतना मोटा और इतना लम्बा ! ये कैसे हो गया रे, तेरे बाप का तो बित्ते भर का भी नहीं है, और यहाँ तू बेलन के जैसा ले के घूम रहा है?

'ओह माँ, मेरी इसमें क्या गलती है। ये तो शुरु में पहले छोटा-सा था, पर अब अचानक इतना बड़ा हो गया है तो मैं क्या करुँ?'
'गलती तो तेरी ही है जो तूने इतना बड़ा जुगाड़ होते हुए भी अभी तक मुझे पता नहीं चलने दिया। वैसे जब मैंने देखा था नहाते वक्त, तब तो इतना बड़ा नहीं दिख रहा था रे?'
'हाय माँ, वो. वो.' मैं हकलाते हुए बोला- वो इसलिये क्योंकि उस समय यह उतना खड़ा नहीं रहा होगा। अभी यह पूरा खड़ा हो गया है।'
'ओह ओह, तो अभी क्यों खड़ा कर लिया इतना बड़ा? कैसे खड़ा हो गया अभी तेरा?'

अब मैं क्या बोलता कि कैसे खड़ा हो गया, यह तो बोल नहीं सकता था कि माँ तेरे कारण खड़ा हो गया है मेरा, मैंने सकपकाते हुए
कहा- अरे, वो ऐसे ही खड़ा हो गया है। तुम छोड़ो, अभी ठीक हो जायेगा।
'ऐसे कैसे खड़ा हो जाता है तेरा?' माँ ने पूछा और मेरी आँखों में देख कर अपने रसीले होठों का एक कोना दबा के मुस्काने लगी।
'अरे, तुमने पकड़ रखा है ना, इसलिये खड़ा हो गया है मेरा! क्या करुँ मैं? हाय छोड़ दो ना!'

मैं किसी भी तरह से माँ का हाथ अपने लंड पर से हटा देना चाहता था। मुझे ऐसा लग रहा था कि माँ के कोमल हाथों का स्पर्श पाकर
कहीं मेरा पानी निकल ना जाये।
फिर माँ ने केवल पकड़ा तो हुआ नहीं था, वो धीरे धीरे मेरे लंड को सहला भी और बार-बार अपने अंगूठे से मेरे चिकने सुपाड़े को छू भी
रही थी।

'अच्छा, अब सारा दोष मेरा हो गया? और खुद जो इतनी देर से मेरी छातियाँ पकड़ कर मसल रहा था और दबा रहा था, उसका कुछ नहीं?'
'चल मान लिया गलती हो गई, पर सजा तो इसकी तुझे देनी पड़ेगी, मेरा तूने मसला है, मैं भी तेरा मसल देती हूँ।'
कह कर माँ अपने हाथों को थोड़ा तेज चलाने लगी और मेरे लंड का मुठ मारते हुए मेरे लंड की मुंडी को अंगूठे से थोड़ी तेजी के साथ
घिसने लगी।

मेरी हालत एकदम खराब हो रही थी, गुदगुदाहट और सनसनी के मारे मेरे मुंह से कोई आवाज नहीं निकल पा रही थी, ऐसा लग रहा था जैसे कि मेरा पानी अब निकला कि तब निकला।
पर माँ को मैं रोक भी नहीं पा रहा था, मैंने सिसयाते हुए कहा- ओह माँ, हाय निकल जायेगा, मेरा निकल जायेगा।
इस पर माँ और जोर से हाथ चलाते हुए अपनी नजर ऊपर करके मेरी तरफ देखते हुए बोली- क्या निकल जायेगा?

'ओह ओह, छोड़ो ना, तुम जानती हो, क्या निकल जायेगा! क्यों परेशान कर रही हो?'
'मैं कहाँ परेशान कर रही हूँ? तू खुद परेशान हो रहा है।'
'क्यों, मैं क्यों भला खुद को परेशान करूँगा? तुम तो खुद ही जबरदस्ती पता नहीं क्यों मेरा मसले जा रही हो?'
'अच्छा, जरा ये तो बता, शुरुआत किसने की थी मसलने की?'
कह कर माँ मुस्कुराने लगी।

मुझे तो जैसे सांप सूंघ गया था, मैं भला क्या जवाब देता, कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि क्या करूँ, क्या ना करूँ? ऊपर से मजा इतना आ रहा था कि जान निकली जा रही थी।
तभी माँ ने अचानक मेरा लंड छोड़ दिया और बोली- अभी आती हूँ।
और एक कातिल मुस्कुराहट छोड़ते हुए उठ कर खड़ी हो गई और झाड़ियों की तरफ चल दी।
मैं उसको झाड़ियों की ओर जाते हुए देखता हुआ वहीं पेड़ के नीचे बैठा रहा।

जहाँ हम बैठे हुए थे, झाड़ियाँ वहाँ से बस दस कदम की दूरी पर थी। दो-तीन कदम चलने के बाद माँ पीछे की ओर मुड़ी और बोली- बड़ी जोर से पेशाब आ रही थी, तुझे आ रही हो तो तू भी चल, तेरा औजार भी थोड़ा ढीला हो जायेगा, ऐसे बेशरमों की तरह से खड़ा किये हुए है।
और फिर अपने निचले होंठ को हल्के से काटते हुए आगे चल दी।

मेरी कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ। मैं कुछ देर तक वैसे ही बैठा रहा। इस बीच माँ झाड़ियों के पीछे जा चुकी
थी।
झाड़ियों की इस तरफ से जो भी झलक मुझे मिल रही थी, वो देख कर मुझे इतना तो पता चल ही गया था कि माँ अब बैठ चुकी है और शायद पेशाब भी कर रही है।

मैंने फिर थोड़ी हिम्मत दिखाई और उठ कर झाड़ियों की तरफ चल दिया। झाड़ियों के पास पहुंच कर नजारा कुछ साफ दिखने लगा था। माँ आराम से अपनी साड़ी उठा कर बैठी हुई थी और मूत रही थी।
उसके इस अंदाज से बैठने के कारण पीछे से उसकी गोरी गोरी जाँघें तो साफ दिख ही रही थी, साथ साथ उसके मक्खन जैसे चूतड़ों का निचला भाग भी लगभग साफ-साफ दिखाई दे रहा था।

यह देख कर तो मेरा लंड और भी बुरी तरह से अकड़ने लगा था। हालांकि उसकी जाँघों और चूतड़ों की झलक देखने का यह पहला मौका नहीं था, पर आज, और दिनों से कुछ ज्यादा ही उत्तेजना हो रही थी।
उसके पेशाब करने की आवाज तो आग में घी का काम कर रही थी। शर्र. शुर्र. सर्र. करते हुए किसी औरत के मूतने की आवाज में पता नहीं क्या आकर्षण होता है, किशोर उमर के सारे लड़कों को अपनी ओर खींच लेती है।
मेरा तो बुरा हाल हो गया था, मैं भी उस तरफ़ चला गया।

तभी मैंने देखा कि माँ उठ कर खड़ी हो गई। जब वो पलटी तो मुझे देख कर मुस्कुराते हुए बोली- अरे, तू भी चला आया?
मैंने तो तुझे पहले ही कहा था कि तू भी हल्का हो ले।'
फिर आराम से अपने हाथों को साड़ी के ऊपर बुर प रख कर इस तरह से दबाते हुए खुजाने लगी जैसे बुर पर लगी पेशाब को पौंछ रही हो और मुस्कुराते हुए चल दी जैसे कि कुछ हुआ ही नहीं।

मैं एक पल को तो हैरान परेशान सा वहीं पर खड़ा रहा।
फिर मैं भी झाड़ियों के पीछे चला गया और पेशाब करने लगा।
बड़ी देर तक तो मेरे लंड से पेशाब ही नहीं निकला, फिर जब लंड कुछ ढीला पड़ा तब जा के पेशाब निकलना शुरु हुआ। मैं पेशाब करने के बाद वापस पेड़ के नीचे चल पड़ा।

पेड़ के पास पहुंच कर मैंने देखा माँ बैठी हुई थी, मेरे पास आने पर बोली- आ बैठ, हल्का हो आया?
कह कर मुस्कुराने लगी। मैं भी हल्के हल्के मुस्कुराते कुछ शरमाते हुए बोला- हाँ, हल्का हो आया।
और बैठ गया।
कहानी जारी रहेगी।
 

Users Who Are Viewing This Thread (Users: 0, Guests: 0)


Online porn video at mobile phone


बहीण भाव झवाझवी गोष्टीചേച്ചി വായിൽ അടിউল্টে পাল্টে চুদতে লাগলামzavazavi bolavtamil sex story kayal mehar sangeetha in hosyelசெம கட்டை அத்தைआईला घोडी बनवली नागडीপুটকির ফুটোতে ঢুকিয়ে എന്റെ അമ്മയുടെ വലിയ പൂർஉணச்சி புண்டைஅத்தை முலைচুদে দে ভাই xnxxantarvasna.in2ದೇಸಿ kannada ಆಂಟಿ ಹೊಸ ಕಾಮ ಕಥೆबीवी की चुदाई कुत्ते ने कीરાતે ભાભી ની કમર પાતળી જોઇமனைவியை வைத்து ஒரு சூதாட்டம்pundaikamakathaikalபெண்ணாக மாறினேன் காம கதைகள்kamam madanthaiచెల్లి బావా తో 15মাক পুতেকৰ sexvideoବୋଉ ବିଆ ରେ ପୁଅচোদন গ্রামের চোদন কথাमोट्या पुच्चीची कथाత్రిబుల్ ధమాకా Episode 4আন্টির ভোদা চাটা গল্পappavin vappatti Tamil kamakathai दूध दबादबाकर रंग लगायाXnxxx বিলাকমিলSamiyarin kamaveriसलवार काढून झवलोফেমডম সেক্রGay tamil bus travel sex kathai iravu payanamগাড়িতে মায়ের দুধ টিপলামमामीने लंड चुकला नयी फैशन वाली मालकीन चुदीകൂതിയിൽ അടിച്ചോodiagapasexलहान बहिणीची ठुकाई रोजமறதி காமகதைகள்பொண்டாட்டி யின் காமகதைಸೂಳೆ ತುಲ್ಲು ಹರಿಯುವ ಕಥೆಗಳುଗେହିଁବା କଥାdidi se pyar kiya apna banaya kahaniଚଉଠି ରାତିର ଅନୁଭୂତିThathaa pethi sex stories newbhopal me hai profail ledig ki chudai .comtamil thangachi sexstoreyఅమ్మ కొడుక్కు సెక్స్ కధలমা কাজের ছেলে চটিதங்கை புண்டை காமகதைகள்മരിയ ആന്റിWWW.கர்ப்பமாக்கும் காம கதை.காம்திரும்புடி பூவை வைக்கனும் காம கதைசின்ன பெண் சின்ன பையன் ஓக்கும் வீடியோಅನುಪಮಾ ಆಂಟಿಯೊಂದಿಗೆ ಕಾಮಾದಾಟ 2சித்தியின் வாசம் 27மதி அண்ணி புண்டைफुफा और मुनिया की चुदाई कहानीsankari akka tamil.sex storiesபுண்டை சுவைসুন্দরী গূহবধুর যৌন কাহিনীதங்கையின் குஞ்சுஎனக்கு ரெண்டு புருஷங்கআপন বোনকে চুদে মাল ভরে দেওয়াকাপড় পড়া চুদাচুদি চটিஅத்தை சொர்க்கம் புண்டை கதைகள்ଚିପିଲିআমি আর ভাই মিলে ভাবিকে চুদলামഎന്റെ കന്തിൽநிர்வாணபடங்கள் காமகதைகள்ஓல் வீடியொடாக்டர் நஸ்ரியா பார்ட் 2বউকে চুদার গল্পசித்தி மற்றும் அக்கா காமகதைxxx सेक्स मामाच्या मुली अंघोळ करताना कथा मराठीಹೆಂಡತಿ ಮೊಲೆ ಹಾಲುচটি মাল ফালার মতোतिच्या कोवळ्या केस नसलेल्या पुच्चीलादीदी बनली माझी बायकोஐட்டி உள்ள பெரிய சுன்னிদুই পা কাধে নিয়া চুদলামবাংলা আন্টির বালে ভরা গুদ চটিKya kar rahe ho jaan fuck salwar suit bhabhilalitha pundaiমাকে জরিয়ে দরে চোদা Bangla Hot Chotiমাগির ভরাট পাছা চুদলামAssamese sex story বৰমা চুদাझवाझवी कथा Oxxx माझा लवडा तिचा पुचितছোট খোকা চোদଗେହିமார்வாடி பெண்+காம கதைகள்Xxx பால் முலை ComAntervsna hindi /पलते पलते सुबह हो गई sasur ji plz thread அம்மாவுக்கு கீழே மயிரே இல்லைtamil kammakathiবাংলা চটি পরকিয়া জোরে জোরে ঠাপাও সোনাஅப்பாவி காம வெறி கதைகள்